“नना कोरोबी या ओकी” का मतलब है: “सात बार गिरो, लेकिन आठवीं बार उठ जाओ।”
यह कहावत सिखाती है कि चाहे जिंदगी में कितनी भी कठिनाइयाँ आएँ, हमें कभी हार नहीं माननी चाहिए। हर गिरने के बाद उठने का जज़्बा बनाए रखना जरूरी है, क्योंकि सफलता उन्हीं को मिलती है जो मुश्किलों से हारने की बजाय उनसे लड़ने का हौसला रखते हैं।
दारुमा डॉल और इस कहावत की कहानी
यह कहावत जापान की एक प्रसिद्ध वस्तु, दारुमा डॉल, से जुड़ी हुई है। दारुमा डॉल को संघर्ष और अच्छे भाग्य का प्रतीक माना जाता है।
दारुमा डॉल का डिज़ाइन बोधिधर्म नामक व्यक्ति के जीवन से प्रेरित है, जो ज़ेन बुद्धिज्म के संस्थापक थे। एक कहानी के अनुसार, बोधिधर्म ने 9 साल तक एक गुफा में ध्यान किया। उनका ध्यान इतना गहन और केंद्रित था कि इस दौरान उनके हाथ और पैर की गतिविधि बंद हो गई। लेकिन उन्होंने अपनी आध्यात्मिक यात्रा कभी नहीं छोड़ी। उनका दृढ़ निश्चय और लगन आज भी लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
दारुमा डॉल की बनावट ऐसी होती है कि इसे अगर गिराया जाए, तो यह खुद-ब-खुद वापस खड़ा हो जाती है। यह इसी कहावत का प्रतीक है कि गिरना असफलता नहीं है, बल्कि हर बार उठ खड़े होना ही असली जीत है।
दारुमा डॉल खरीदते समय इसकी आँखें खाली होती हैं। जब आप कोई लक्ष्य तय करते हैं या इच्छा करते हैं, तो एक आँख में रंग भरते हैं। इसे अपनी आँखों के सामने ऐसी जगह रखते हैं, जहाँ यह आपको बार-बार दिखे। यह आपको अपने लक्ष्य की याद दिलाता रहता है।
जैसे ही आप अपना लक्ष्य हासिल कर लेते हैं, आप डॉल की दूसरी आँख को भी रंग देते हैं। यह प्रक्रिया न केवल आपके लक्ष्य को पूरा करने का प्रतीक है, बल्कि आपकी मेहनत और संघर्ष की भी याद दिलाती है।
कहावत और कहानी का संदेश
“नना कोरोबी या ओकी” और दारुमा डॉल की कहानी हमें सिखाती है कि गिरना कोई हार नहीं है। असली मायने इस बात के हैं कि आप हर बार गिरने के बाद फिर से उठ खड़े होते हैं।
जिंदगी में कठिनाइयाँ और असफलताएँ आना तय है। लेकिन यह आपकी दृढ़ता और सकारात्मक सोच पर निर्भर करता है कि आप उन्हें कैसे पार करते हैं। चाहे व्यक्तिगत समस्याएँ हों या पेशेवर संघर्ष, यह कहावत हमें याद दिलाती है कि हर बार अपने आप को संभालकर फिर से खड़ा होना ही सफलता की कुंजी है।
दारुमा डॉल का संदेश हमें यह भी सिखाता है कि लक्ष्य को ध्यान में रखकर मेहनत करना चाहिए। जैसे एक डॉल हर बार गिरने पर वापस खड़ी होती है, वैसे ही हमें अपने जीवन के हर पड़ाव पर डटे रहना चाहिए।
यह कहावत और कहानी हमें प्रेरित करती है कि संघर्ष का सफर ही सफलता का असली अर्थ है। गिरना हमारी कमजोरी नहीं, बल्कि हर बार उठना हमारी ताकत है।
आध्यात्मिक प्रेरणा और जीवन का सबक
“सात बार गिरना और आठवीं बार उठ जाना” केवल एक कहावत नहीं है, बल्कि यह जीवन को देखने का एक नजरिया है। यह हमें सिखाता है कि कठिनाइयों से घबराने की बजाय उनसे लड़ने का हौसला रखना चाहिए। जो लोग हार मान लेते हैं, वे कभी अपनी मंज़िल तक नहीं पहुँच पाते।
दारुमा डॉल और यह जापानी कहावत हमें हर मुश्किल घड़ी में याद दिलाती है कि गिरना इंसान की प्रकृति है, लेकिन बार-बार उठने का जज़्बा ही उसे महान बनाता है।
